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आस्था का महासंगम ‘कुम्भ’….. तो चलो कुम्भ चलें!

आस्था, विश्वास और संस्कृतियों के मिलन का पर्व है कुम्भ.

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Kumbh Mela

आस्था, विश्वास और संस्कृतियों के मिलन का पर्व है कुम्भ. कुम्भ मेला कोई इतिहास बनाने के लिए नहीं शुरू किया गया. बल्कि आज लोगों ने इस मेले को अपनी अटूट श्रध्दा और भक्ति से ऐतिहासिक बना दिया है. वैसे भी धार्मिक परंपराए केवल आस्था और विश्वास पर टिकती हैं, ना कि इतिहास पर. ये कहा जा सकता है कि कुम्भ जैसा विशाल मेला धर्म और भक्तों को एक सूत्र में बांधने के लिए ही आयोजित किया जाता है.

संगमनगरी प्रयागराज में भक्तों का सबसे बड़ा संग्रहण ‘कुम्भ मेला’ हैं. यहां हर दिन संतों और श्रद्धालुओं का पहुंचना लगातार जारी है. इन दिनों पूरा शहर मानो आस्था में डूबा हुआ है. ‘कुम्भ’ शब्द कानों में पड़ते ही जैसे गंगा, यमुना और सरस्वती इन त्रिवेणी संगम की चमक दिमाग में छा जाती है. मन भक्ति-भाव में लीन हो जाता है. योग, आध्यात्म, धर्म-पुराण, अखाड़ो के शाही स्नान, संत पंडालों से निकलते धार्मिक मंत्रोच्चार, देव्स्थानो के दिव्य दर्शन, त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाते लोग, भारतीय संस्कृति की अनोखी छठा. इस संगम नगरी में आपको ये सब देखने को मिलेगा. तो आइए चलते हैं प्रयागराज कुम्भ में-

इसलिए लगता है हर साल ‘कुम्भ मेला’

हम सभी इस बात से वाकिफ ही हैं कि भारत में आयोजित होने वाले सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से प्रमुख ‘कुम्भ मेला’ है. कहते हैं कुम्भ का पर्व हर 12 साल के अंतराल पर चारों में से किसी एक पवित्र नदी के तट पर किया जाता है. जो हैं हरिद्वार में गंगा, उज्जैन में शिप्रा, नासिक में गोदावरी और इलाहाबाद में त्रिवेणी संगम जहां पर गंगा यमुना और सरस्वती मिल जाती हैं. ऐसे में बात करें ज्योतिष की तो उनके अनुसार जब बृहस्पति कुंभ राशि में और सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता हैं, तब कुम्भ मेले का आयोजन करते हैं. इसी के साथ प्रयाग का कुम्भ मेला सभी मेलों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है? आइए बताते हैं-

Sadhu Kumbh Mela

कहते हैं ‘कलश’ ज्योतिष शास्त्र में कुम्भ राशि का भी यही चिह्न हैं और कुम्भ मेले की पौराणिक मान्यता अमृत मंथन से जुड़ी हुई हैं. समुद्र के मंथन से जो सबसे मूल्यवान रत्न निकला वह था ‘अमृत’. उसे ही पाने के लिए देवताओं और राक्षसों के बीच लड़ाई हुई. कहते है राक्षसों से अमृत को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने वह कलश इंद्र पुत्र ‘जयंत’ को सौप दिया था. जब राक्षसों ने गरुड़ से वह कलश छीनना चाहा तो उस पात्र में से अमृत की कुछ बूंदें छलक कर इलाहाबाद, नासिक, हरिद्वार और उज्जैन में ​जाकर गिर गईं थीं.

अमृत के लिए देव-दानवों में बारह दिन तक लगातार युद्ध हुआ था. देवताओं के बारह दिन मनुष्यों के बारह वर्ष के समान होते हैं. इसलिए कुंभ भी बारह होते हैं. उनमें से चार कुंभ पृथ्वी पर होते हैं और बाकी आठ कुंभ देवलोक में होते हैं, जिन्हें देवता ही प्राप्त कर सकते हैं. कहते हैं जिस समय में चंद्रादिकों ने कलश की रक्षा की थी. जिस साल जिस राशि पर सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति का संयोग होता है, उसी साल उसी राशि के योग में, जहाँ-जहाँ अमृत बूँद गिरी थी, वहां-वहां कुम्भ पर्व होता है.

प्रयागराज कुम्भ मेले की कई खासियत है जो आपको यहां जाने के लिए मजबूर कर देगा.

Shahi Snan

दीपदान, शोभायात्रा और शाही स्नान

भारत में प्रकृति के विभिन्न स्वरूपों जैसे नदी, पर्वत ,वृक्ष आदि को देव-स्वरुप माना गया है और उनकी आराधना करने का प्रचलन भी आदि काल से चल रहा है. आदर एवं सम्मान से ओत-प्रोत तीर्थराज प्रयाग संगम तट पर त्रिवेणी की भव्य रूप से आरती होती है, जिसमे विशाल जनसमूह श्रद्धाभाव से सम्मिलित होता है. शाम को डूबता हुआ सूरज चारों तरफ लालिमा और मंत्रोच्चार के बीच त्रिवेणी की भव्य आरती, लाखों दीपों की जगमग आपकी आँखों को चकाचौंध कर देगी. यहां विशेष दिन शोभायात्रा भी निकाली जाती है. वहीं शाही स्नान 4 मार्च को महाशिवरात्रि के दिन होगा. महाशिवरात्रि 2019 के दिन ही कुम्भ मेले का समापन किया जाएगा. कहा जा रहा है कि इस साल करीब 15 करोड़ लोग संगम में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य कमाएंगे. बता दें कि इस बार किन्नर अखाड़े को भी मान्यता मिली है जिसके बाद शाही स्नान में इस बार आम लोगों के साथ-साथ 14 अखाड़ों के साधु संतों ने हिस्सा लिया. इसके पहले 13 अखाड़े थे.

हस्त कला, सांस्कृतिक कार्यक्रम

कुम्भ मेले में एक बड़ा आकर्षण का केंद्र हब कलाग्राम है. यहां पर भारतीय कला और संस्कृति की एक झलक दिखाई देगी. कई राज्यों के फेमस शिल्पकला, हस्तशिल्प चीजें आप यहां से खरीद सकते हैं. इतना ही नहीं आप यहां पर आयोजित होने वाले संस्कृतिक कार्यक्रम, लेज़र लाइट शो देखने का मज़ा भी उठा सकते हैं.

नए और आकर्षक टूरिस्ट वॉक

यहां पर देश-विदेश से आने वाले श्रधालुओं का पूरा कुम्भ मेला देखने के लिए काफी अच्छा इंतजाम किया गया है. सबसे पहले इस मेले की शुरुआत शंकर विमान मण्डपम से होती है. फिर अगले पड़ाव में बड़े हनुमान जी का मंदिर, पतालपुरी मंदिर, अक्षयवट, इलाहाबाद फोर्ट और रामघाट आदि का दर्शन कर सकते है.

Kumbh Prayag

लजीज़ व्यंजन भी हैं कमाल

एक फूडी और फूड लवर होने के नाते आप किसी भी नयी जगह अपना स्वाद तलाश करते ही हैं. तो आपको बता दूं इस महाकुम्भ में भी आपको अपनी डाइट मिल जाएगी. यहां इंदोरी स्पेशल चाट और पापड़ी खाने को मिलेगी. प्रयागराज की शान कही जाने वाली फेमस कचौड़ी को आप चखने से खुद को रोक नहीं पाएंगे. इसी के साथ जलेबी, रसगुल्ले, साउथ इंडियन डोसा और गोलगप्पे भी कमाल के हैं.

संगम में लीजिए बोट और टेंट का मज़ा

साधारण नाव-बोट के अलावा कुम्भ में एयरबोट भी चल रही है. ये एयरबोट 80 किलोमीटर कि रफ़्तार से 16 लोगों को ले जा सकती है. सभी बोट में आपकी सेफ्टी के लिए लाइफजैकेट भी दी गयी है. इसके साथ ही यहां पर कुम्भ टेंट सिटी भी बनाया गया है. जहां पर प्रति बेड के हिसाब से भी टेंट की सुविधा दी जा रही है.

अब सोचना क्या अभी तक नहीं गए…. तो चलो कुम्भ!

 

 

 

 

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