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लिव-इन-रिलेशनशिप….जानें कितना सही, कितना गलत?

लिन-इन रिलेशनशिप है कितनी सही, और कितनी गलत

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लव मैरिज हो या अरेंज, दोनों ही केस में आजकल सभी लोग एक दूसरे को शादी से पहले अच्छे से जानने समझने के लिए समय चाहते हैं. लव मैरिज में तो आप अपने पार्टनर को अच्छे से जानते ही होंगे, वहीं अरेंज मैरिज में आपको सगाई से शादी के बीच अपने पार्टनर को समझने के कुछ ही मौके मिलते है. फिर जब बाद में आपको उनके बारे में पता चलता है तब अफ़सोस होता है कि काश मैंने पहले ही कुछ समय साथ बिता लिया होता तो आज मैं उससे शादी नहीं करता या करती.

अगर एक लड़का और लड़की साथ में रहते हैं तो सबसे पहले यही दिमाग में आता है कि शादीशुदा होंगे. लेकिन पिछले कुछ समय से एक नया रिवाज इस दुनिया में आ गया है और वो रिवाज है लिव-इन रिलेशनशिप का.

लिव-इन-रिलेशनशिप..! ये एक ऐसा मसला है जिसे कानून ने तो मान्यता दे दी है लेकिन समाज स्वीकार नहीं कर पाया है. जिस समाज में हम रहते हैं वो एक लड़की का और लड़के का भी अपने फ्रेंड्स के घर रातभर रुकना नहीं स्वीकार कर पाता है. अगले दिन कॉलोनी के आंटी, अंकल मुँह से कुछ न बोले लेकिन उनके एक्सप्रेशन बहुत कुछ सुना देते हैं. वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो नाईटआउट का अलग ही फायदा उठाते हैं.

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आज कुछ युवा इसका समर्थन करते हैं तो कुछ लोग इस पश्चिमी कांसेप्ट पर आपत्ति जताते हैं. भारत देश अनेकों संस्कृति का धनी हैं, जिस वजह से यहां अभी भी लोग रीति-रिवाजों का पालन करते हैं.

क्या ये सही नहीं हैं कि ऐसा कोई मौका मिले जिससे हम भी अपने पार्टनर को अच्छे से समझ जाए? या फिर किसी को जानने या समझने के लिए कुछ महीने या साल काफी नहीं होते? ऐसे ही कंफ्यूज़िंग सवालों को दूर करने के लिए आइये जानते हैं कितना सही और कितना गलत है लिव-इन में रहना.

क्या हैं लिव-इन-रिलेशनशिप?

लिव इन रिलेशनशिप का मतलब होता है जब एक लड़का और लड़की आपसी सहमती के बाद बिना शादी के साथ रहते हैं. शादी के बिना ही पति पत्नी के जैसे रहना लिव इन रिलेशनशिप कहलाता है. आजकल भारतीय शहरों में इस विदेशी कल्चर का चलन बहुत तेजी से बढ़ रहा है.

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कार्तिक आर्यन और कृति सैनोन फिल्म लुका छुपी के एक दृश्य में

लोगों का मानना है कि जब लड़का लड़की एक दूसरे को जांचने और परखने के लिए लिव-इन-रिलेशनशिप में रहते हैं तो  ऐसा करने से उन्हें इस बात का अंदाजा हो जाता है कि वह आगे भविष्य में एक दूसरे के साथ जिंदगी गुजार सकते हैं कि नहीं!…. इसलिए वह लिव-इन-रिलेशनशिप का रास्ता चुनते हैं. वहीं कुछ लोग लिव-इन को टाइमपास और इच्छा पूर्ति का एक ज़रिया भी मानते हैं. और इनका गलत फ़ायदा उठाते हैं.

गलत नहीं हैं लिव-इन में रहना

अगर आप अपनी फॅमिली के बीच रहते हैं तो उनके बारे में सब कुछ जान समझ जाते हैं. ऐसे ही किसी के साथ कुछ महीने में ही आप उनकी दिनचर्या के अलावा बेसिक नेचर भी जान-समझ सकते हैं. लिव इन रिलेशनशिप गलत नहीं हैं. अगर आप अपने पार्टनर के साथ लिव-इन में रह रहे हैं तो आपको उसके बारे में बहुत सारी बातें जानने को मिलती हैं. कोई ज्यादा से ज्यादा कितने दिन तक बनावटी हो सकता हैं. तो समय के साथ आप जल्द ही उनको समझ सकते हैं.

शादी के बाद आपको कौन-कौन सी जिम्मेदारियां उठानी पड़ेगी, यह सब समझ आ जाता है. अगर आप वाकई लिव इन में ये सोच के आ रहे हैं की आपको अपने पार्टनर को समझने के लिए ये कदम उठा रहे हैं तभी आप एक सही फैसला ले सकते हैं. लिव इन में आपको गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड वाली हवाई बाते नहीं बल्कि पति पत्नी वाली डेली लाइफ का असली जायज़ा मिल जाता हैं. तब आपको अपनी जिम्मेदारियों का एहसास हो जाता है.

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छोटी-छोटी खुशियों से लेकर लाइफ में आती फाइनेंशियल प्रॉब्लम को झेलने तक का अनुभव मिल जाता हैं. इतना ही नहीं अगर आप लंबे समय से एक दूसरे के साथ लिव इन में रहते हैं, तो उस मेल पार्टनर की संपत्ति में फीमेल पार्टनर ऑटोमेटिकली आधे हिस्से की हकदार हो जाती है. ये कानून बनाया गया है. इस कानून के हिसाब से मेल पार्टनर को इसका पालन करना पड़ता है.

लिव-इन में झेलने पड़ सकते हैं ये नुकसान

जहां लिव-इन में रहने के कई सारे फायदे हैं, वहीं कई नुकसान भी हैं. और ये नुकसान आपको लंबे समय तक भरने पड़ सकता हैं. अगर लिव इन में आपको पार्टनर बुरा मिल गया है, तो यह रिलेशनशिप टूटने के बाद आपको जिंदगीभर वो रिश्ता बुरे ख्याल की तरह याद आता रहता है.

जो लोग लिव-इन में रहते हैं उन दोनों को हमेशा इस बात का डर रहता है, कि उनका पार्टनर कभी भी रिश्ता तोड़ के जा सकता हैं. क्योंकि लिव इन में एक दूसरे को कभी भी छोड़कर जाने की आज़ादी होती है. इसके बाद जब आपके रिलेशनशिप के बारे में फॅमिली को पता चलता है तो वो भी बेवजह बहुत परेशान होते हैं और इसी वजह से आपको भी तनाव झेलना पड़ जाता है.

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जो लोग बहुत ज्यादा भावुक होते हैं उनके लिए भी लिव इन रिलेशनशिप बहुत घातक साबित हो सकती है. क्योंकि दो लोग एक दूसरे के साथ रहते हैं तो कई बार छोटी छोटी बातें भी दोनों के बीच तनाव का कारण बन जाती हैं.

क्योंकि एक ही घर में वह एक दूसरे के साथ रह रहे हैं, तो सुलाह होने की बजाय उनमें और भी ज्यादा तनाव हो जाता है बल्कि अगर वह दूर रहते तो वह तनाव उनका सुलझ भी सकता है. बात की जाए भारतीय समाज की, तो आज भी भारतीय समाज के काफी लोग इस लिव इन रिलेशनशिप को अच्छा नहीं मानते हैं.

लिव इन रिलेशनशिप में सबसे बड़ी और खतरनाक बात यह होती है कि आप इसमें एक दूसरे के साथ बिना शादी के पति पत्नी की तरह रहते हैं. यानी कि सेक्सुअल रिलेशनशिप भी बनाते हैं. ऐसे में उनके रिलेशनशिप खत्म होने के बाद अगर वह किसी और के साथ अपना भविष्य बना रहे हैं या शादी कर रहे हैं. तो उनकी शादीशुदा जिंदगी भी खराब हो सकती है.

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लिव इन रिलेशनशिप पर क्या कहता है कानून?

लिव इन रिलेशनशिप के फैसले पर दिल्ली और देश भर के वकीलों ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर सिंगल व्यक्ति के लिए लिव-इन- रिलेशनशिप को सही बताया है. लिव इन रिलेशनशिप को कानून ने किसी व्यक्ति का व्यक्तिगत निर्णय माना है और भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निहित व्यक्ति के जीवन के अधिकार से ये गलत नहीं है. कुछ साल पहले लिव-इन के मामले में काफी बहस हुई थी. आपको बता दें इंद्र शर्मा बनाम वी.केवी शर्मा के ऐतिहासिक निर्णय में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि हर रिश्ते की तरह लिव-इन न तो अपराध है और न ही पाप. लेकिन ये देश में सामाजिक रूप से स्वीकार नहीं है. शादी करने का या ना करने का फैसला बेहद व्यक्तिगत होता है.

हालांकि आज तक लिव-इन-रिश्तों से निपटने के लिए कोई कानून तैयार नहीं किया गया है. लेकिन अब यह माना जाता है कि इस तरह के रिश्ते में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के लिए और मानसिक प्रताड़ना और धमकी आदि के खिलाफ पुरुषों के संबंध में विशिष्ट प्रावधान किए जाने चाहिए. अब लिव-इन-रिलेशनशिप के फायदे और नुकसान आप समझ ही गए होंगे, तो अब फैसला अपका है कि लिव इन रिलेशनशिप कितना सही है, और कितना गलत.

 

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